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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 70
शुक्तिविशालैराचार्यता शिरासन्ततैरधर्मरताः । उन्नतशिराभिराक्याः स्वस्तिकवत् संस्थिताभिश्च ॥
नाड़ियों से व्याप्त ललाट वाले पाप में रत, ललाट के मध्य में ऊँची नाड़ी बाले धनी और ललाट में स्वस्तिक की तरह रेखा वाले पुरुष धनाढ्य होते हैं।
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