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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 64
हरिणाक्षा मण्डललोचनाश्च जिक्षैश्च लोचनैश्चौराः । कूराः केकरनेत्रा गजसदृशविलोचना श्चमूपतयः ॥
हरिण के समान गोल और अबल नेत्र बाले चोर, नीले नेत्र वाले क्रूर, हाथी के समान नेत्र वाले सेनापति, गहरे नेत्र वाले
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