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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 58
रोमशकर्णा दीर्घायुषश्च धनभागिनो विपुलकर्णाः । کیا क्रूरा शिरावनदैर्व्यालम्वैर्मासलैः सुखिनः ॥
रोमयुक्त कान वाले दीर्घायु, बड़े कान वाले धनी, नाड़ियों से युत कान वाले क्रूर तथा लम्बे और पुष्ट कान बाले सुखों होते हैं।
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