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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 57
निर्मासैः कणैः पापमृत्यवश्चर्पटैः सुबहुभोगाः । कृपणाच हस्वकर्णः शङ्कु श्रवणाश्चमूपतयः ॥
मांसरहित कान वाले मनुष्य पापकर्म से मरते हैं तथा चपटे कान वाले अधिक भोगी, छोटे कान वाले कृपण, शंकु के समान आगे से तीखे कान वाले सेनापति
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