चतुरस्रं धूर्तानां निम्नं वनं च तनयरहितानाम्।
कृपणानामतिह्रस्वं सम्पूर्ण भोगिनां कान्तम् ॥
निम्न मुख वाले पुत्रहीन, छोटे मुख वाले कृपण एवं सम्पूर्ण तथा सुन्दर मुख वाले मनुष्य भोगी होते हैं।
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