मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 53
वक्त्रं सौम्यं संवृतममलं श्लक्ष्णं समं च धूपानाम् । विपरीतं क्लेशभुजां महामुखं दुर्भगाणां च ॥
सुन्दर, वर्तुलाकार, निर्मल, स्तक्ष्ण और समान मुख राजाओं का होता है। इससे उलटा (कुरूप, वक्राकार, मलिन, अश्लक्ष्ण और विषम) मुख भाग्यरहित लोगों का होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें