वक्त्रं सौम्यं संवृतममलं श्लक्ष्णं समं च धूपानाम् । विपरीतं क्लेशभुजां महामुखं दुर्भगाणां च ॥
सुन्दर, वर्तुलाकार, निर्मल, स्तक्ष्ण और समान मुख राजाओं का होता है। इससे उलटा (कुरूप, वक्राकार, मलिन, अश्लक्ष्ण और विषम) मुख भाग्यरहित लोगों का होता है।
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