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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 51
ओष्ठैः स्फुटितविखण्डिताधवर्णरूक्षैश्च धनपरित्यक्ताः । स्निग्धा धनाश्च दशनाः सुतीक्ष्णदंष्ट्राः समाश्च शुभाः ॥
अघर वाले राजा, छोटे अधर वाले राजा तथा फटे, खण्डित, वर्णरहित और रूखे अधर वाले मनुष्य धनहीन होते हैं। मनुष्यों के स्निग्ध, घन, तीक्ष्ण और सम दाँत शुभ होते हैं।
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