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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 48
रेखाः प्रदेशिनिगताः शतायुषं कल्पनीयमूनाभिः । छिनाभिर्दुमपतरं बहुरेखारेखिणो निःस्वाः ॥
मनुष्य के अंगुल में तिरी स्तरेखाये हो काने उसके पुत्र और जितनी मूक्ष्म रेखायें हो, उनीउको कन्या होती हैं। जिनकी तर्मनी के मूल तक तीन रेखा गई हो, वेशीवर्ष तक जीवित रहते हैं। यदि सोटी रक्षा
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