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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 47
मकरध्वजकोष्ठागारमनि-शुभिर्महाधनोपेताः वेदीनिभेन चैवाग्निहोत्रिणो ब्रह्मतीर्थेन ॥
अफर (मगा पदियाल), धन और कोशागार की तरह हाथ में देखा हो तो बहुत धनी आकारी, देवन्दिा आदि (सिंहासन, श्रीवृक्ष और सूर) या त्रिभुज की तरह हाथ में दे हो तो यह मनुष्य धार्मिक होता है।
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