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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 44
तिस्रो रेखा मणिबन्धनोत्थिताः करतलोपगा नृपतेः । मीनयुगाङ्कितपाणिर्नित्यं सत्रप्रदो भवति ॥
जिसकी तीन रेखा पहुँचे से निकल कर हथेली में जाय, वह मनुष्य राजा होता है। दो मत्यरेखाओं से पुत हमेला देने का होता है। यदि हाथ में अज्ञ के समान (मध्य में पता और दोनों और विस्तृत रेखा हो तो वह मनुष्य धनी, मछली
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