मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 4
प्रविरलतनुरोमवृनजङ्घा द्विरदकरप्रतिमैर्वरोरुभिश्च । उपचितममज्ञानवध भूपा धनरहिताः चमृगालतुल्यजङ्गाः ॥
विरल तथा मूक्ष्म रोमों में युत, गजशुण्ड के समान सुन्दर ऊरु वाले तथा पुष्ट और सन्मान जानु वाले मनुष्य राजा होते हैं एवं कुत्ते और सियार के सदृश नद्धा पाले मनुष्य धनहीन होते है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें