निर्मासौ रोमचिती भग्नावल्यौ च निर्धनस्यांसौ। विपुलावव्युच्छिन्नौ सुश्लिष्टी सौख्यवीर्यवताम् ॥
मांसहीन, रोमों से युत, भग्न तथा छोटे कन्ये निर्धन मनुष्यों के होते हैं तथा विस्तीर्ण, अधान और परस्पर संलग्न कन्ये सुखों और बली पुरुषों के है है।
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