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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 33
अस्वेदनपीनोअतसुगन्धसमरोमसङ्गलाः कक्षाः। विज्ञातव्या धनिनामतोऽन्यचाद्यैर्विहीनानाम् ॥
पसीने से रहित, पुष्ट, ऊँची, सुगन्धयुत, समान तथा रोमों से व्याप्त काँख धनिकों को होती है। पसीने से युत, अपुष्ट, नीची, दुर्गन्धयुत, विषम और रोमरहित काँख निर्धनों को होती है।
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