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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 28
हृदयं समुन्नतं पृथु न वेपनं मांसलं च नृपतीनाम् । अधनानां विपरीतं खररोमचितं शिरालं च ॥
राजाओं का हृदय ऊँचा, विस्तीर्ण और कम्प से रहित होता है। निर्धनों का हृदय विपरीत लक्षणों (नीचा, कृश, सकम्प तथा कठोर रोम) से युक्त तथा शिराओं से व्याप्त होता है।
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