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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 27
सुभगा भवन्त्यनुद्वद्धचूचुका निर्धना विषमदीर्घंः । पीनोपचितनिमग्नैः क्षितिपतयश्चचुकैः सुखिनः ॥
जिनके चूचुक ( स्तन के अग्र भाग) ऊपर की ओर खींचे न हों, वे पुरुष सुभग होते हैं। जिनके विषम (छोटे-बड़े) और लम्बे हों, वे निर्धन होते हैं तथा जिनके चूचुक कठोर, पुष्ट तथा नीचे हों, वे राजा और सुखी होते हैं।
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