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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 25
विषमवलयो मनुष्या भवन्त्यगम्याभिगामिनः पापाः । ऋजुवलयः सुखभाजः परदारद्वेषिणश्चैव ॥
विषम (छोटी-बड़ी) वलि वाले अगम्या स्त्री में गमन करने वाले तथा सीधी वलि वाले मनुष्य सुखी एवं परस्त्री से विमुख होते हैं।
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