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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 24
शखान्तं स्त्रीभोगिनमाचार्य बहुसुतं यथासंख्यम् । एकद्वित्रिचतुर्भिर्वलिभिर्विन्द्याद् नृपं त्ववलिम् ॥
एक वलि (उदर की रेखा) वाले मनुष्य का शत्र से मरण होता है। दो वलि वाले मनुष्य बहुत स्त्रियों को भोगने वाले होते हैं। इसी प्रकार तीन बलि वाले उपदेशक, चार वलि वाले बहुत पुत्रों से युत और वलिरहित उदर वाले मनुष्य राजा होते हैं।
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