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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 23
पार्णयता चिरायुषमुपरिष्टाच्वेश्वरं शतपत्रकर्णिकाभा नाभिर्मनुजेश्वरं गवाक्यमयः । कुरुते ॥
दोनों पार्च में आयत नाभि दीपार, ऊपर की तरफ आयत नाभि ऐश्वर्य, नीचे की तरफ आयत नाभि गायों से युक्त और कमलकोर की आकृति के समान आकृति वाली नाभि मनुष्य को राजा बनाती है।
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