पेट की बलि के मध्य में स्थित एवं विषम नाभि शूली पर चढ़ाती और निर्धन बनाती है। वामावर्त नाभि शठ एवं दक्षिणावर्त नाभि तत्त्वज्ञानी करती है।
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