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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 2
अस्वेदनौ मृदुतलौ कमलोदराभौ श्लिष्टाङ्गुली रुचिरताप्रनखौ सुपाष्र्णी । उष्णौ शिराविरहितौ सुनिगूढगुल्फौ कूर्मोन्नती च चरणौं मनुजेश्वरस्य ॥
स्वेदरहित, कोमल तल वाले, कमलोदर के समान, सम्मिलित अंगुलियों से युत, ताम्र वर्ण के सुन्दर नख वाले, सुन्दर एड़ियों से युत, गरम, शिराओं से रहित, छिपी हुई पाँव की गाँठी वाले और कछुये के पृष्ठ के समान पाँव राजा के होते हैं।
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