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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 19
अविकलपार्श्व धनिनो निम्नैर्वकैश्च भोगसन्त्यक्ताः । भोगाड्या निम्नाभिभोंगपरिहीनाः ॥
अविकल ( परिपूर्ण) पार्श्व (कटि के ऊपर का चार अंगुल भाग) वाला मनुष्य धनी, निम्न और वक्र पार्श्व वाला अभोगी एवं समान कुक्षी (उदरमध्य भाग) वाला भोगी और निम्न कुक्षी वाला अभोगी होता है।
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