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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 16
मदिरागन्ये यज्वा क्षारसगन्ये च रेतसि दरिद्रः । शीघ्रं मैथुनगामी दीर्घायुर ऽन्यथाऽल्पायुः ॥
वीर्य में मद्य के समान गन्ध हो तो यज्ञ करने वाला, खार के तुल्य गन्ध हो तो निर्धन, शीघ्र मैथुन करने वाला दीर्घायु और देर तक मैथुन करने वाला अल्पायु होता है।
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