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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 14
परिशुष्कबस्तिशीषैर्धनरहिता दुर्भगाश्च विज्ञेयाः । कुसुमसमगन्यशुक्रा विज्ञातव्या महीपालाः ॥
जिनके बस्ति (नाभि और लिङ्ग के मध्यभाग) के ऊपर का भाग मांसरहित हो, ये निर्धन और सबके लिये अप्रिय होते हैं। जिनके वीर्य में पुष्प के समान गन्ध हो, वे राजा होते हैं।
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