एकैव मूत्रधारा वलिता रूपप्रदा न सुतदात्री । स्निग्धोन्त्रतसममणयो धनवनितारत्नभोक्तारः ॥
वेष्टित एक मूत्रधारा मनुष्य को सुन्दर तो बनाती है, किन्तु पुत्र नहीं देती है। जिनके मणि स्निग्ध, ऊँचे और सम हों, वे पुरुष धन, स्त्री और रत्नों को भोगने वाले होते हैं।
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