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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 115
श्रान्तस्य यानमशनं च पानं तृषापरिगतस्य भयेषु बुभुक्षितस्य रक्षा । एतानि यस्य पुरुषस्य भवन्ति काले धन्यं वदन्ति खलु तं नरलक्षणज्ञाः ॥
जिस मनुष्य को धकने पर सवारी, भूख लगने पर भोजन, प्यास लगने पर पानी और भय के समय रक्षक मिल जाय; मनुष्य के लक्षण जानने वाले पण्डित उस मनुष्य को भाग्यशाली कहते हैं।
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