मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 113
भीरुः क्षुधालुर्बहुभुक् च यः स्याद् शेयश्च सत्त्वेन नरस्तिरश्चाम् । एवं नराणां प्रकृतिः प्रदिष्टा यल्लक्षणज्ञाः प्रवदन्ति सत्त्वम् ॥
तिर्यक् प्रकृति वाला पुरुष डरपोक, क्षुधा को नहीं सहन करने वाला और बहुत भोजन करने वाला होता है। इस तरह मनुष्यों की प्रकृति का लक्षण कहा गया है, जो प्रकृतिलक्षणज्ञों के द्वारा सत्त्व नाम से कही जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें