मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 112
तीक्ष्णप्रकोपः खलचेष्टितश्च पापश्च सत्त्वेन निशाचराणाम् । पिशाचसत्त्वश्चपलो मलाक्तो बहुप्रलापी च समुल्यणाङ्गः ॥
राक्षस प्रकृति वाला मनुष्य क्रोधी, दुष्ट स्वभाव वाली और पापी होता है। पिशाच प्रकृति वाला मनुष्य चञ्चल, मलिन, बहुत प्रलाप करने वाला और मोटे शरीर वाला होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें