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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 11
द्वित्रिचतुर्धाराभिः प्रदक्षिणावर्तवलितमूत्राभिः । पृथिवीपतयो ज्ञेया विकीर्णमूत्राश्च धनहीनाः ॥
जिनके दक्षिणावर्त क्रम से दो, तीन या चार मूत्र की धारा होकर गिरती हो, वे राजा होते हैं। जिनकी मूत्रधार इधर-उधर बिखरती हो, ये निर्धन होते हैं।
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