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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 109
अग्निप्रकृत्या चपलोऽतितीक्ष्णक्षण्डः क्षुयालुर्बहु भोजनश्च । वायोः स्वभावेन चलः कुशश्च क्षिप्रश्न कोपस्य वशं प्रयाति ॥
अग्नि प्रकृति वाला मनुष्य चञ्चल, खल, फूर, क्षुधा को नहीं सहने वाला और बहुत भोजन करने वाला होता है। वायु प्रकृति बाला मनुष्य चञ्चल, दुर्बल और बहुत जल्दी क्रोध के वश में आने वाला होता है ।
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