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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 108
महीस्वभावः शुभपुष्पगन्यः सम्भोगवान् सुश्वसनः स्थिरश्च । तोयस्वभावो बहुतोयपायी प्रियाभिभाषी रसभाजनश्च ॥
भूमि प्रकृति वाला पुरुष सुन्दर पुष्पों के समान गन्ध बाला, भोगी, सुगन्धियुत भ्रास वाला और स्थिर स्वभाव वाला होता है। जल प्रकृति वाला मनुष्य अधिक जल पीने वाला, मधुर बोलने वाला और मधुर रसप्रिय होता है।
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