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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 107
भूजलशिख्यनिलाम्बरसुरनररक्षः पिशाचकतिर चाम् । सत्त्वेन भवति पुरुषो लक्षणमेतद् भवति तेषाम् ॥
पुरुषों में भूमि, जल, अग्नि, वायु, आकाश, देवता, मनुष्य, राक्षस, पिशाच, तिरछे चलने वाले - इनका सत्त्व (स्वभाव) होता है, उनके ये वध्यमान लक्षण हैं।
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