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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 106
विंशतिवर्षा नारी पुरुषः खलु पञ्चविंशतिभिरब्दैः । अर्हति मानोन्मानं जीवितभागे चतुर्थे वा ॥
बीस वर्ष की खो और पच्चीस वर्ष वाले पुरुष के उन्मान और मान का विचार करना चाहिये अथवा गणित से निर्णीत आयु का चतुर्थ भाग व्यतीत हो जाने पर उन्मान और मान का विचार करना चाहिये ।
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