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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 104
अष्टष्शतं षण्णवतिः परिमाणं चतुरशीतिरिति पुंसाम्। उत्तमसमहीनानामङ्गुलसङ्ख्या स्वमानेन ॥
अपनी अंगुलियों से १०८ अंगुल अपनी ऊँचाई हो तो उत्तम, ९६ अंगुल हो तो मध्यम और ८४ अंगुल हो तो अधम होता है।
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