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बृहत्संहिता • अध्याय 68 • श्लोक 100
स्नेहः पञ्चसु लक्ष्यो वाग्जिह्वादन्तनेत्रनखसंस्थः । सुतधनसौभाग्ययुताः स्निग्यैस्तैर्निर्धना रूक्षैः ॥
पुरुष की वाणी, जीभ, दाँत, आँख, नख-इन पाँच स्थानों में स्नेह का विचार करना चाहिये। जिनके ये पाँचों स्निग्ध हों वे पुरुष पुत्र, धन और सौभाग्य से युत तथा जिनके रूक्ष हों वे निर्धन होते हैं।
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