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बृहत्संहिता • अध्याय 67 • श्लोक 8
दीर्घाङ्गुलिरक्तपुष्कराः सजलाम्भोदनिनादबृंहिणः । बृहदायतवृत्तकन्यरा धन्या भूमिपतेर्मतङ्गजाः ॥
हाथियों के मुँह के अग्र भाग को 'पुष्कर' और पुष्कर के अग्र भाग को 'अंगुली' कहते हैं। जिनकी दीर्घ अंगुली लाल पुष्कर, जलपूर्ण मेघगर्जन के समान गलगर्जन, विस्तीर्ण दीर्घ और वर्तुलाकार ग्रीवा हो, ऐसे हाथी राजा के लिये शुभ होते हैं।
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