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बृहत्संहिता • अध्याय 67 • श्लोक 7
विस्तीर्णकर्णहनुनाभिललाटगुद्याः कूपोंप्रतद्विनवविंशतिभिर्नखैध रेखात्रयोषचितवृत्तकराः सुवाला सुगन्धिमदपुष्करमारुताद्ध ॥
कुग्धों में एक-एक सूक्ष्म रोग वाला, जिलो कान, हनु नाभि, ललाट और लिङ्ग बाला, कये के समान अद्वारह या बीम नख वाला, बीन रेखाओं में युत, वर्तुलाकार मूड वाला तथा सुगन्धयुत महाईड वायु वाला हाथी शुभ होता है।
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