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बृहत्संहिता • अध्याय 67 • श्लोक 5
भद्रस्य यशों हरितो मदच मन्दस्य हारिद्रकसत्रिकाशः । कृष्णो मद‌द्याभिहितो मृगस्य सङ्कीर्णनागस्य मदो विभिन्नः ॥
भद्र जाति के हाथी का पद हरा, मन्द जाति का हल्दी के समान पीला, मृग जाति का काला और सङ्कीर्ष जाति के हाथी का पद मिश्रित वर्ष का होता है।
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