मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 67 • श्लोक 3
मृगास्तु हस्वाधरवालमेड्रास्तन्वप्रिकण्ठद्विजहस्तकर्णाः । स्थूले क्षणा क्षेति यथोक्तचिह्नः सङ्कीर्णनागा व्यतिमिश्नचिह्नाः ॥
जिनके नीचले ओंठ, पूँछ के बाल और लिङ्गा छोटे हों, कण्ठ, दाँत, सूँड और कान छोटे हों तथा बड़ी आँख हों, वे हाथी 'मृग' संज्ञक होते हैं। पूर्वोक्त तीनों हाथियों के लक्षण मिश्रित रूप से जिनमें मिलते हैं, वे हाथी 'संकीर्ण' संज्ञक होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें