वक्षोऽय कक्षावलयः श्लथाच लम्बोदरस्त्वग्बृहती गलश्च। स्थूला च कुक्षिः सह पेचकेन सेंही च दृग् मन्दमतङ्गजस्य ॥
जिसके छाती और कक्षावलय (शरीर के मध्य का वलय) बोले हों, पेट लम्बा हो, स्यूल चमड़ा, कण्ठ, पेट और पूँछ के जड़ा हो तथा सिंह के समान दृष्टि हो, वह हाथी 'मन्द' संज्ञक होता है।
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