मध्वाभदन्ताः सुविभक्तदेहा न चोपदिग्धा न कृशाः क्षमाच। गात्रैः समैश्चापसमानवंशा वराह, स्वैर्जघनैश्च भद्राः ॥
गजों की भद्र, मन्द, मृग और मित्र- ये चार जातियाँ होती हैं। उनमें प्रथमतः पठित भद्र जाति वाले गज का लक्षण इस प्रकार है-
शहद के समान रंग के दाँत वाले, अवयवों के विभाग से परिपूर्ण, बहुत स्थूल, बहुत दुर्बल, कार्यक्षम, तुल्य अंगों से युत, धनुषाकार पृष्ठवंश (पीठ की हड्री वाले) तथा सूअर के समान वर्तुलाकार जानु और कमर वाले हाथी 'भद्र'संज्ञक होते हैं।
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