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बृहत्संहिता • अध्याय 66 • श्लोक 4
तेषां प्रपाण एको ललाटकेशेषु च ध्रुवावर्ताः । रन्नोपरन्प्रमूर्धनि वक्षसि चेति स्मृती द्वौ द्वौ ॥
घोड़ों के देह में दश रोमाषर्त अवश्य होते हैं, इनको ध्रुवावर्त कहते हैं। जैसे प्रपाण और मस्तक के केश में एक-एक तथा रन्ध्र (कुधि और नाभि के मध्य भाग ), रन्ध्र के ऊपरी भाग, मस्तक, छाती- इन चार स्थानों में दो-दो, इस प्रकार दस ध्रुवा- वर्त होते हैं।
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