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बृहत्संहिता • अध्याय 66 • श्लोक 2
अनुपातहनुगण्डहद्गलप्रोथशङ्ख कटिबस्तिजानुनि मुष्कनाभिककुदे तथा गुदे सव्यकुक्षिचरणे तथा शुभाः ॥
नेत्र के अधोभाग, हनु, मुख, कपोल, हृदय, गल (हृदय-कण्ठ की सन्धि), प्रोथ (नासिका का अधोभाग), शङ्ख (कान के समीप), कटि, बस्ति ( नाभि और लिङ्ग का मध्य), जानु, अण्डकोश, नाभि, ककुद (बाहु के पृष्ठभाग में कृकाटिका के समीप), गुदा, दक्षिण भाग का पेट, पाँव-इन अंगों में जिसके रोम का आवर्त हो, वह घोड़ा अशुभ होता है।
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