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बृहत्संहिता • अध्याय 65 • श्लोक 3
स्तनवदवलम्बते यः कण्ठेऽजानां मणिः स विज्ञेयः । एकमणिः शुभफलकृद्धन्यतमा द्वित्रिमणयो ये ॥
छागों के गले में स्तन की तरह जो लटका रहता है, उसको 'मणि' कहते हैं। एक मणि वाले शुभ और दो या तीन मणि वाले छाग अत्यन्त शुभ होते हैं।
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