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बृहत्संहिता • अध्याय 65 • श्लोक 10
अथाप्रशस्ताः खरतुल्यनादाः प्रदीप्तपुच्छाः कुनखा विवर्णाः । निकृत्तकर्णा द्विपमस्तकाश्च भवन्ति ये चासिततालुजिह्वाः ॥
गदहे के समान शब्द करने वाले, गर्म या टेड़ी पूँछ वाले, खराब नख वाले, खराब वर्ण वाले, फटे कान वाले, हाथी के समान मस्तक वाले तथा काली तालु और जीभ वाले छाग अशुभ होते हैं।
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