मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 64 • श्लोक 2
अञ्जनभृङ्गश्यामतनुर्वा बिन्दुविचित्रोऽ व्यङ्गशरीरः । सर्पशिरा वा स्थूलगलो यः सोऽपि नृपाणां राष्ट्रविवृद्धयै ॥
अञ्जन या भ्रमर के समान श्याम वर्ण वाला, बिन्दुओं से चित्रित, सम्पूर्ण अंग वाला और मोटे गले वाला कछुआ राजाओं का राज्य बढ़ाने के लिये होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें