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बृहत्संहिता • अध्याय 64 • श्लोक 1
स्फटिकरजतवर्णो नीलराजीविचित्रः कलशसदृशमूर्ति शारुवंशच कूर्मः । अरुणसमवपुर्वा सर्षपाकारचित्रः सकलनृपमहत्त्वं मन्दिरस्थः करोति ॥
स्फटिक या चाँदी के समान वर्ण वाला, नीली रेखाओं से चित्रित, कलश के समान आकृति वाला, सुन्दर पीठ की हड्डी वाला, लाल वर्ण वाला या सरसों के समान बिन्दुओं से चित्रित कछुआ राजा के महत्त्व को बढ़ाने वाला होता है।
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