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बृहत्संहिता • अध्याय 61 • श्लोक 3
दशसप्तचतुर्दन्त्यः प्रलम्बमुण्डानना विनतपृष्ठ्यः । हस्वस्थूलग्रीवा यवमध्या दारितखुराश्च ॥
दश, सात या चार दाँत वाली, लम्बी मुख वाली, विना सींग वाली, झुकी हुई पीठ वाली, छोटी तथा मोटी गरदन वाली, जौ के समान मध्य भाग से मोटी, फटे हुये खुर वाली,
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