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बृहत्संहिता • अध्याय 61 • श्लोक 2
सास्त्राविलरूक्षाक्ष्यो मूषकनयनाश्च न शुभदा गावः । प्रचलच्चिपिटविषाणाः करटाः खरसदृशवर्णाश्च ॥
आसुओं से भरी आँखों वाली, गँदली आँखों वाली, रूखी आँखों वाली, चूहे के समान आँखों वाली, हिलती हुये सींग वाली, चपटे सींग वाली, कृष्ण, लोहित वर्ण वाली और गदहे के समान वर्ण वाली गौ शुभ देने वाली नहीं होती है।
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