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बृहत्संहिता • अध्याय 61 • श्लोक 18
भूस्पृग्वालधिराताम्रविषाणो रक्तदृक् ककुद्यांश्च । कल्माषश्च स्वामिनमचिरात् कुरुते पतिं लक्ष्म्याः ॥
जिसकी पूँछ भूमि को छूती हो, ताम्र वर्ण का सींग हो, लाल आँखें हों, पूही से युक्त हो और कल्माष (लाल सफेद और पीला मिश्रित) वर्ण हो, ऐसा बैल शौघ्र हो अपने स्वामी को धनी बना देता है।
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