वैदूर्यमल्लिकाबुद्धदेक्षणाः स्थूलनेत्रपक्ष्माणः । पार्ष्णिभिरस्फुटिताभिः शस्ताः सर्वे च भारसहाः ॥
वैदूर्य मणि, मल्लिका ( वेला) पुष्य या जलयुद्धद के समान नेत्र वाले, स्थूल नेत्र और शरीर वाले, जिसके खुर के पिछले भाग फूटे न हों- ऐसे बैल शुभ तथा भार उठाने में समर्थ होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।